कानपुर में ‘मौत की वैन’ का खेल: एक्सपायर गाड़ियां, फर्जी फिटनेस और बच्चों की जान से खिलवाड़

✍️By: Nation Now Samachar Desk
कानपुर में ‘मौत की वैन’ का खेल: एक्सपायर गाड़ियां, फर्जी फिटनेस और बच्चों की जान से खिलवाड़

कानपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां सड़कों पर दौड़ रही कई वैनें नियमों को खुलकर धता बता रही हैं। आरोप है कि एक्सपायर, कंडम और स्क्रैप हो चुकी गाड़ियों को भी कथित रूप से फिटनेस प्रमाण पत्र देकर सड़कों पर उतार दिया गया है, जिससे मासूम बच्चों की जान हर दिन जोखिम में पड़ रही है।

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक, कई स्कूली वैन बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रही हैं। इन वाहनों में न तो फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इसके बावजूद ये वैनें रोजाना सैकड़ों बच्चों को ढोने का काम कर रही हैं।सबसे गंभीर बात यह है कि कई वैन ड्राइवरों के पास कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। नियमों के अनुसार, स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के लिए विशेष सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षित ड्राइवर की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां इन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब इन वैनों में क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। कई मामलों में देखा गया है कि 8-10 बच्चों की क्षमता वाली वैन में 15 से 20 तक बच्चों को बैठाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में बच्चों को सुरक्षित निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है।

आरोप यह भी है कि इन सभी अनियमितताओं के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की कथित ‘चौथ’ के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं।

कई वाहन ऐसे भी हैं जो पूरी तरह से कंडम घोषित किए जा चुके हैं, लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन गाड़ियों की हालत इतनी खराब है कि इन्हें चलाना खुद ड्राइवर के लिए भी खतरे से खाली नहीं है, लेकिन इन पर बच्चों को बैठाकर रोजाना स्कूल भेजा जा रहा है।

वहीं कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि फर्जी नेम प्लेट और वर्दी का इस्तेमाल कर वाहन चालकों द्वारा खुद को अधिकृत बताने की कोशिश की जाती है, जिससे अभिभावकों को भ्रमित किया जा सके। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता हुआ प्रतीत होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की लापरवाही पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों की सुरक्षा के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भी अनदेखी है।अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कई लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे वाहनों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बच्चों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर कब और कैसे सख्त कदम उठाता है।

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