रायबरेली: “ऐ मौलाना बाहर जाओ”, BJP मंत्री राकेश सचान की बात इतनी सी थी, लेकिन दिल को लगी बहुत!

✍️By: Nation Now Samachar Desk
रायबरेली: "ऐ मौलाना बाहर जाओ", BJP मंत्री राकेश सचान की बात इतनी सी थी, लेकिन दिल को लगी बहुत!

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मामला जिला पंचायत सभागार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जहां प्रभारी मंत्री राकेश सचान लोकसभा में महिला संबंधी बिल पर चर्चा कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सभागार में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ-साथ कुछ आम लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान एक फरियादी व्यक्ति भी वहां पहुंचा और बैठ गया। बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति दाढ़ी और टोपी पहने हुए था। उसे संभवतः यह उम्मीद थी कि प्रेस वार्ता के बाद मंत्री उसकी बात भी सुनेंगे, इसलिए वह वहीं बैठा रहा।इसी बीच पत्रकारों की ओर से यह आवाज उठी कि सभागार में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। भीड़ बढ़ने के कारण स्थान की कमी महसूस होने लगी।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंत्री राकेश सचान ने कुछ लोगों से बाहर जाने को कहा ताकि पत्रकारों के लिए बैठने की व्यवस्था की जा सके। इसी दौरान उन्होंने उस दाढ़ी-टोपी वाले व्यक्ति को भी संबोधित करते हुए कथित रूप से कहा, “ऐ मौलाना बाहर जाओ।”

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) May 3, 2026

यह बयान कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।कई लोगों ने इस बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी पहचान या पहनावे के आधार पर इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि स्थान की कमी थी, तो सभी को सामान्य तरीके से बाहर बैठने या जाने के लिए कहा जा सकता था।

वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि मंत्री का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय का अपमान करना नहीं था, बल्कि भीड़ और व्यवस्था को नियंत्रित करना था। उनके अनुसार, यह एक स्थिति प्रबंधन का हिस्सा था, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने भी इस वीडियो को लेकर सवाल उठाए हैं और बयान की भाषा पर आपत्ति जताई है।सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे संवेदनशीलता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे एक प्रशासनिक टिप्पणी मान रहे हैं।

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