कानपुर देहात: ‘धरती माता बचाओ’ अभियान को लेकर सख्ती, उर्वरक बिक्री और निगरानी पर प्रशासन के कड़े निर्देश

कानपुर देहात: जिले में कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से तहसील रसूलाबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ‘धरती माता बचाओ’ अभियान, उर्वरक निगरानी समिति, पीएम प्रणाम योजना और फार्मर रजिस्ट्री से संबंधित विषयों पर केंद्रित रही। बैठक की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी ने की, जिसमें कृषि विभाग और उर्वरक व्यवसाय से जुड़े कई अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।बैठक में जिला कृषि अधिकारी डा. उमेश गुप्ता, तहसीलदार रसूलाबाद, सहायक विकास अधिकारी (कृषि), इफको के अधिकारी और क्षेत्र के थोक व फुटकर उर्वरक विक्रेता मौजूद रहे। इस दौरान उर्वरकों के उपयोग, वितरण और निगरानी को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

‘धरती माता बचाओ’ अभियान पर जोर
बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और उर्वरक विभाग द्वारा ‘धरती माता बचाओ’ अभियान की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को रोकना, मृदा स्वास्थ्य को सुधारना और उर्वरकों की कालाबाजारी व अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाना है।अधिकारियों ने कहा कि किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।
ग्राम स्तर पर निगरानी के निर्देश
उप जिलाधिकारी ने सहायक विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर ग्राम पंचायत में नियमित रूप से ग्राम सभा बैठकों का आयोजन किया जाए। इन बैठकों में उर्वरकों के सही उपयोग और नकली या अवैध उर्वरकों की पहचान पर चर्चा की जाए। यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो उसकी सूचना तुरंत जिला कृषि अधिकारी कार्यालय को दी जाए।
उर्वरक विक्रेताओं के लिए सख्त नियम
उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए गए। उन्हें कहा गया कि उर्वरक केवल निर्धारित मूल्य पर ही बेचा जाए और किसी भी प्रकार की ओवररेटिंग या जबरन टैगिंग न की जाए।साथ ही प्रत्येक दुकान पर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वितरण रजिस्टर अनिवार्य रूप से अपडेट रखा जाए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किसानों को सीमित मात्रा में उर्वरक वितरण
बैठक में यह भी तय किया गया कि किसानों को उनकी जमीन के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। एक हेक्टेयर भूमि पर अधिकतम 7 बैग यूरिया और 5 बैग डीएपी देने की सीमा निर्धारित की गई है। इसके लिए खतौनी के आधार पर सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
डिजिटल निगरानी और स्टॉक मिलान
उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक, गोदाम में उपलब्ध उर्वरक और रजिस्टर में दर्ज मात्रा का मिलान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
नियमित निरीक्षण और रिपोर्टिंग
उप जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी उर्वरक दुकानों का मासिक निरीक्षण किया जाए और इसकी रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी कार्यालय को भेजी जाए। साथ ही निगरानी समिति को किसानों से फीडबैक लेने और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया।
उत्तर प्रदेश से और खबरें

शिक्षामित्रों को पहचान और संबल दे रही योगी सरकार, 5 मई को गोरखपुर में सीएम करेंगे सम्मान
3 मई 2026
UPNEWS : चयनित अभ्यर्थियों ने सीएम योगी का जताया आभार, कहा- महिलाओं को भी मिल रहा पूरा सम्मान
3 मई 2026
अमेठी :कैंसर इलाज की नई उम्मीद, लींस ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट बना क्षेत्र का पहला रेडिएशन सेंटर
3 मई 2026