CISF के बहादुर डॉग Max को एयरपोर्ट पर नम आंखों से विदाई, सालों की सेवा को मिला सम्मान

✍️By: Nation Now Samachar Desk
CISF के बहादुर डॉग Max को एयरपोर्ट पर नम आंखों से विदाई, सालों की सेवा को मिला सम्मान

Sri Guru Ram Dass Jee International Airport पर उस समय भावुक माहौल बन गया, जब CISF के बहादुर और प्रशिक्षित डॉग Max को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। वर्षों तक एयरपोर्ट की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले इस स्निफर डॉग ने अपनी सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और सुरक्षा बलों का भरोसेमंद साथी बना रहा।Max सिर्फ एक डॉग नहीं था, बल्कि CISF टीम का एक महत्वपूर्ण सदस्य था। उसकी सूंघने की क्षमता और ट्रेनिंग ने कई बार संभावित खतरों को समय रहते पहचानने में मदद की। यही वजह रही कि उसकी विदाई के दौरान वहां मौजूद हर अधिकारी और जवान भावुक नजर आया।

विदाई समारोह को बेहद सादगी और सम्मान के साथ आयोजित किया गया। CISF अधिकारियों ने Max को फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया और उसके योगदान को याद किया। इस दौरान कई जवानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें उन्होंने बताया कि कैसे Max ने हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता दी।एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों और अन्य लोगों ने भी इस वफादार डॉग के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कई लोगों ने Max के साथ तस्वीरें लीं और उसकी सेवा के लिए धन्यवाद कहा। यह दृश्य दर्शाता है कि एक जानवर भी अपने समर्पण और निष्ठा से लोगों के दिलों में खास जगह बना सकता है।

Max की ट्रेनिंग बेहद सख्त और अनुशासित रही थी। उसे विस्फोटक पदार्थों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था। CISF के डॉग स्क्वॉड में शामिल ऐसे डॉग्स सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं।डॉग्स और उनके हैंडलर्स के बीच एक गहरा रिश्ता होता है। Max और उसके हैंडलर के बीच भी ऐसा ही मजबूत जुड़ाव देखने को मिला। विदाई के दौरान यह रिश्ता साफ झलक रहा था, जब उसका हैंडलर भावुक होकर उसे आखिरी सलामी दे रहा था।

सेवा से रिटायर होने के बाद ऐसे डॉग्स को आमतौर पर विशेष देखभाल दी जाती है। उन्हें आरामदायक जीवन दिया जाता है ताकि वे अपने बाकी के दिन शांति और प्यार के साथ बिता सकें। Max भी अब अपने जीवन के नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां उसे ड्यूटी से राहत मिलेगी।

CISF जैसे सुरक्षा बलों में डॉग्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ये न सिर्फ सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं, बल्कि अपने व्यवहार और निष्ठा से टीम का मनोबल भी बढ़ाते हैं। Max की विदाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ये मूक साथी भी किसी सच्चे सैनिक से कम नहीं होते।अंत में, Max की कहानी हमें यह सिखाती है कि समर्पण, अनुशासन और वफादारी किसी भी रूप में हो, उसका सम्मान हमेशा किया जाता है। उसकी विदाई भले ही भावुक थी, लेकिन यह उसके शानदार करियर का गर्व भरा समापन भी था।

दिल्ली से और खबरें